Wednesday, March 13, 2019

पत्ते से जीना सीखें




शाखा पर लगा पत्ता
अपने संगी संग
मस्त रहता है
दिन-रात
हर मौसम में
बिना ग्लानि
बिना  असंतोष
सब सहता है
गिरने के भय बिना 
हिलता -डुलता है
हवा के वेग से झूमता है
एक  ही स्थान पर दृढ़ 
अपने साहस के 
सभी प्रमाण देता है
फिर एक दिन 
डाल से अलग होता है
मिट्टी में मिल जाता है
किंतु पहले पूरा जीता है
कहने को  पत्ता है
किंतु सही अर्थ में
हमें सिखाता है
अनमोल जीवन
ऐसे जिया जाता है!
ऐस जिया जाता है!
--------------------
             

            वीरेंद्र सिंह
             =======





31 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14.3.2018 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3274 में दिया जाएगा

    हार्दिक धन्यवाद

    ReplyDelete
    Replies
    1. दिलबाग विर्क जी, आपका आभार। ये जानकर अति प्रसन्नता हुई।

      Delete
  2. Replies
    1. अनीता जी धन्यवाद। सादर।

      Delete
  3. Replies
    1. जोशी जी धन्यवाद। सादर।

      Delete
  4. Replies
    1. अनीता जी धन्यवाद। सादर।

      Delete
  5. आपकी लिखी रचना रविवार 17 मार्च 2019 के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी, आपका धन्यवाद। ये जानकर हर्षित हूं। आभार। सादर।

      Delete
  6. बहुत सुंदर सारगर्भित सृजन..👌😊

    ReplyDelete
  7. स्वेता जी, बहुमूल्य टिप्पणी के लिए आपका धन्यवाद। सादर।

    ReplyDelete
  8. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन फाउंटेन पैन का शौक और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

    ReplyDelete
  9. जी, धन्यवाद। जानकर अति प्रसन्नता हुई।

    ReplyDelete
  10. बहुत सुन्दर ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. मीना जी, धन्यवाद। सादर।

      Delete
  11. गहरी बात कह दी आपने। नज़र आती हुये पर भी यकीं नहीं आता।

    ReplyDelete
    Replies
    1. संजय जी धन्यवाद। सादर।

      Delete
  12. वाह बहुत सुन्दर विश्लेषण करती रचना।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका बहुत-बहुत आभार। सादर।

      Delete
  13. Replies
    1. आपका हार्दिक आभार। आगे भी आती रहिएगा।

      Delete
  14. Replies
    1. ओंंकार जी धन्यवाद। आगे भी आते रहिएगा।

      Delete
  15. बहुत सुन्दर, सार्थक रचना....

    ReplyDelete
  16. सुधा जी धन्यवाद। आगे भी आती रहिएगा।

    ReplyDelete
  17. जीवन का सार लिए सुंदर रचना ,सादर

    ReplyDelete
  18. ज्योति सिंह जी आपका धन्यवाद। आगे भी आती रहिएगा।

    ReplyDelete
  19. Replies
    1. आपका धन्यवाद। आगे भी आते रहिएगा।

      Delete
  20. आपके द्वारा रचित इस उत्कृष्ट रचना पर मैं बहुत विलम्ब से आया वीरेंद्र जी । सच ही हमें पत्ते से जीना सीखना चाहिए । वास्तव में अपनाने योग्य जीवन-दर्शन तो यही है ।

    ReplyDelete

सभ्य और शालीन प्रतिक्रियाओं का हमेशा स्वागत है। आलोचना करने का आपका अधिकार भी यहाँ सुरक्षित है। आपकी सलाह पर भी विचार किया जाएगा। इस वेबसाइट पर आपको क्या अच्छा या बुरा लगा और क्या पढ़ना चाहते हैं बता सकते हैं। इस वेबसाइट को और बेहतर बनाने के लिए बेहिचक अपने सुझाव दे सकते हैं। आपकी अनमोल प्रतिक्रियाओं के लिए आपको अग्रिम धन्यवाद और शुभकामनाएँ।