Monday, March 25, 2019

दूसरों की चिंता करिए, अपनी जेब भरिए!

अपनी जेब भरने के लिए दूसरों की चिंता करनी ज़रूरी है



बचपन से सुनते आए हैं कि चिंता, चिता समान है! लेकिन किसी ने आज तक नहीं बताया कि दूसरों की चिंता करना तो किसी वरदान से कम नहीं है! दूसरों की चिंता में अपनी नींद खराब करने वालों की जेबें लालाजी के पेट की तरह फूली होती हैं और जिसकी जेब मोटी हो उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता! उदाहरण के लिए कोई भी पॉकेटमार अपनी चिंता कभी नहीं करता! उसे  केवल दूसरों के बटुओं की चिंता होती है! उसकी चिंता कमाल करती है! वो लोगों की पॉकेट उड़ा लेता है और संतोष की सांस लेता है! अपना मनपसंद भोजन करता है! चादर तानकर सोता है! सुबह अंगड़ाई लेते हुए उठता है। नाश्ता करता है और फिर से लोगों की पॉकेट की चिंता शुरू कर देता है! इस प्रकार लोगों की चिंता करते-करते वो बड़े आराम से दिन- महीने- साल गुजारता है! 


Trick of making money. Satire.



बहुत सारे लोग बड़े स्तर पर अपनी छोड़ दूसरों की चिंता करते हैं! कई-कई प्रकार से चिंता करते हैं! इसलिए इनकी  जेबें ही नहीं बल्कि बैंक बैलेंस भी मोटा होता है! साथ में चमचमाती गाड़ियों का जखीरा होता है! ये दूसरों को भी प्रेरित करते हैं कि हमारी तरह तुम भी लोगों की चिंता करो! जो बहुत अच्छे से लोगों की चिंता करते हैं उनको काम पर रखते हैं! इसके लिए बाकायदा मासिक वेतन देते हैं!अतिरिक्त सुविधाएं भी देते हैं! इस कैटेगरी में तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी आती हैं जो लोगों की चिंता करते-करते अरबों - खरबों का बिजनिस करने लगी हैं! 


अपने नेताओं की अपार सफलता के पीछे भी लोगों की चिंता यानी उनके कल्याण का विज्ञान छिपा है। नेता, बचपन से ही लोगों की चिंता करने लगते हैं! मां-बाप का पैसा बचाने के लिए वो पढ़ाई नहीं करते! दूसरों के माल पर मौज उड़ाना शुरू कर देते हैं ताकि मां-बाप की रही-सही चिंता भी खत्म हो जाए! युवा होते-होते वे आत्मनिर्भर हो जाते हैं! जो युवा नेता अत्यधिक होनहार होते हैं वे अतिरिक्त सुख-सुविधाएं भी जुटा लेते हैं! बड़े होने तक यह बात पूरी तरह समझ चुके होते हैं कि लोगों की चिंता करके ही अपने आपको चिंता मुक्त रखा जा सकता है! इसलिए मौक़ा मिलते ही लोगों की चिंता झपट लेते हैं! उसे अपना बना लेते हैं! मान लो कोई युवा नौकरी को लेकर चिंता में है तो युवा  नेता उससे कहेगा कि तुम नौकरी की चिंता कतई न करो। आज से तुम्हारी नौकरी की चिंता मेरी चिंता! तुम बस चार-पांच लाख रुपयों का जुगाड़ करो। बाकी सब मैं देख लूंगा। युवा तत्काल अपनी चिंता युवा नेता को सौंपकर चिंतामुक्त हो जाता है! हंसते-मुस्कराते चार-पांच लाख रुपये युवा नेता को सौंप देता है! दूसरों की चिंता के नाम पर युवा नेता ने चार-पांच लाख झटक लिए। केवल एक बेरोजगार युवा की चिंता को अपनाकर इतना कमा लेना कम नहीं है!

आगे जाकर युवा नेता चुनाव लड़ता है। वो लोगों को भरोसा देता है कि कैसे उसने दूसरों की चिंता को अपनी चिंता समझा है।बेरोजगारों को नौकरी दिलाई है! अगर वो जीता तो उसकी जीत में लोगों की जीत है! उसकी हार में लोगों की हार है! इसलिए मुझे जिताइए! अपनी चिंताएँ मुझे दान कर दीजिए! मैं आपकी चिंताएं दूर करुंगा! युवा नेता चीख-चीख कर जनता से कहता है कि वो अपनी चिंताएं उसके नाम कर दे! जनता तुरंत युवा नेता की बात मान लेती है। अपनी चिंताएं उसे अपर्ण कर देती हैं! उसे अपना बहुमूल्य वोट देकर अपना प्रतिनिधि चुनती है। युवा नेता जनता का युवा प्रतिनिधि बन जाता है। कुछ ही सालों में युवा प्रतिनिधि के साथ-साथ उसके परिजनों और रिश्तेदारों तक की जेबें और बैंक खाते इतने मोटे हो जाते हैं कि उनकी सात पुश्तों तक को कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ती है! 

युवा नेता जब युवा नहीं रहता और थोड़ा अनुभवी हो जाता है तो वो अपनी क्षेत्र के साथ-साथ पूरे देश की चिंता करने लगता है! पूरे देश की चिंता को अपनी चिंता समझने लगता है। वो ऐसा तब तक करता जब तक कि वो पूरे देश का मंत्री बन नहीं जाता है! मंत्री बनते ही वो स्विस बैंक में खाता खोलता है। देश-विदेश में प्रोपर्टी बनाता है। इस प्रकार दूसरों की चिंता करते-करते वो नेता अपने सारे सपने पूरे करता जाता है।

तमाम युवा सारी जवानी एक सरकारी नौकरी की  तैयारी करते करते उम्रदराज और गंजे तक हो जाते हैं लेकिन नौकरी नहीं मिलती। जीवन यापन का सवाल खड़ा हो जाता है। थोड़ा चिंतन करने बाद तय करते हैं कि हमें भले ही  नौकरी न मिली हो लेकिन दूसरे युवाओं को बेकार नहीं रहने देंगे! युवाओं के भविष्य की चिंता करते हुए उन्हें कोचिंग देनी शुरू कर देते हैं और अपनी जीवन यापन का सवाल झटके में हल कर लेते हैं!  

इस चर्चा से यह शिक्षा मिलती है कि लोगों की चिंताओं को अपनी चिंता बनाओ। उन चिंताओं के समाधान के नाम पर आगे बढ़ो। इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। तमाम अरबपतियों-खबरपतियों की कार्यप्रणाली की रिसर्च करने के  बाद यही  निष्कर्ष निकलता है। बाबा रामदेव ने भी यही किया है। लोगों के स्वास्थ्य की चिंता करते-करते आज करोड़ों-अरबों का व्यापार करने लगे हैं। शुरू में बाबा ने अवश्य ही बड़े-बड़े हॉस्पिटलों की कमाई पर रिसर्च की होगी। बाबा अक्सर कहते भी हैं कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने देश में लूट मचा रखी है। बाबा की बात माने या न माने यह आप पर है। सभी राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सफलता का राज यही है। सबने लोगों से कहा कि हमें आपकी हर प्रकार की जरूरत की चिंता है। आप बस दिन-रात पैसा कमाने पर ध्यान दें। अपनी चिंताएं हम पर फेंक दें। हम उनका न केवल ख्याल रखेंगे बल्कि सम्मान भी करेंगे! हिसाब लगा तो आपकी चिंताओं को सम्मानित भी करेंगे। इस प्रकार जिसने भी लोगों की चिंताओं का सम्मान किया, दुनिया ने उनका जबरदस्त (कभी-कभी जबरदस्ती) और भरपूर सम्मान किया है।

लोगों की चिंता कर- कर अपनी आने वाली पीढ़ियों तक की चिंता दूर करने की कथा अनंत है। सार यह है कि अगर अपनी चिंता करते रहे तो  बिना जले ही राख हो जाओगे। दूसरों की चिंता का ढोंग भी करोगे तो आप भी ऐश करोगे। फैसला कर लीजिए। 
       

11 comments:

  1. खुद की चिंता होगी तभी तो दूसरों की चिंता है ये बात बताई जा सकती है ...
    अच्च्गा व्यंग है ...

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    1. सही कहा सर आपने। आपका धन्यवाद।

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  2. Bahut badiya....maja aya a gaya pad kar..

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    1. जी धन्यवाद। आगे भी आते रहिएगा।

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  3. Replies
    1. दुबे जी, धन्यवाद। आगे भी आते रहिएगा।

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  4. बहुत बढ़िया.... ,सादर नमन

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  5. जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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