Sunday, December 27, 2020

डिजिटल मीडिया और पॉडकास्टिंग

डिजिटल मीडिया यानी अंकीय माध्यम का नाम आजकल हम ख़ूब सुन रहे हैं। डिजिटल को हम इस तरह समझ सकते हैं कि कोई भी डेटा जिसे डिजिट्स यानी अंकों की सीरीज़ द्वारा दर्शाया जा सकता है और मीडिया का मतलब किसी भी डेटा  को प्रसारित करने या दूसरों तक पहुंचाने के माध्यम। इस प्रकार  डिजिटल मीडिया से मतलब हुआ कि कोई भी डेटा या सूचना जिसे किसी स्क्रीन द्वारा लोगों तक पहुंचाया जा सके। इसमें टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो, और ग्राफिक्स सभी आ जाते हैं और एक स्क्रीन पर  इंटरनेट की सहायता से हम पढ़, देख, और सुन सकते हैं।  सभी सॉफ्टवेयर, वीडियो गेम्स, वेबसाइटें, सोशल मीडिया, MP3 या डिजिटल ऑडियो, इ-बुक्स, इ-डाक्यूमेंट इत्यादि डिजिटल माध्यम हैं। डिजिटल मीडिया की ख़ास बात यह है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों यानी डिवाइसेज के जरिए हम  इन्हें बना सकते हैं,  डिलीट कर सकते हैं, रूप बदल सकते हैं और दूसरों के साथ शेयर कर सकते हैं।


Digital Media


     



डिजिटल मीडिया के मुकाबले प्रिंट मीडिया जैसे अखबार, किताबें, मैग्जीनों की अपनी सीमाएं हैं। ऑडियो टेप, वीडियो टेप जैसे माध्यम भी डिजिटल के सामने कहीं टिक नहीं पाते। इसकी वजह है कि डिजिटल मीडिया ही अकेला ऐसा मीडिया है जिसमें आप टेक्स्ट पढ़ सकते हैं, वीडियो देख सकते हैं, ऑडियो सुन सकते हैं और फोटो आदि देख सकते हैं। ट्रेडिशनल मीडिया में आपको यह सुविधा नहीं मिलेगी। अखबार- मैग्जीन में केवल टेक्स्ट पढ़ सकते हैं या फोटो देख सकते हैं लेकिन ऑडियो नहीं सुन सकते। वीडियो नहीं देख सकते। रेडियो (जिस पर ऑडियो टेप चलते हैं या लाइव प्रसारण) पर केवल ऑडियो सुन सकते हैं।  टीवी जिस पर (वीडियो टेप चलते हैं या लाइव प्रसारण) पर केवल वीडियो  देख सकते हैं। हालांकि टीवी पर गाने यानी ऑडियो भी सुने जा सकते हैं। लेकिन डिजिटल माध्यम के मुकाबले यह कहीं नहीं ठहरते।  

4जी इंटरनेट यानी तेज़ गति से इंटरनेट की सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अपने देश में डिजिटल क्रांति आ गई है। मनोरंजन के हमारे तौर तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आया है। पहले जहां टीवी और रेडियो ही मनोरंजन के साधन थे वहीं आज एक सस्ते से स्मार्टफोन पर आप टीवी देख सकते हैं, गाने सुन सकते हैं, फोटों और ग्राफिक्स देख सकते हैं, मैग्जीन पढ़ सकते हैं। हम सब इस क्रांति को अपने सामने घटित होता देख रहे हैं।  आज हर वर्ग का व्यक्ति स्मार्ट फोन का इस्तेमाल कर रहा है। स्मार्टफोन को मनोरंजन और ज्ञानवर्धन दोनों के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इसी डिजिटल क्रांति के एक माध्यम या स्वरूप को पॉडकास्ट कहते हैं। जिसका इस्तेमाल हममें से कोई भी कर सकता है। 


क्पा होता है पॉडकास्ट?



रेडियो श्रोता तो हम सभी रहे हैं। रेडियो का अपना एक मज़ा है। इसमें ज्यादा झंझट नहीं होती। प्रोग्राम लगाओ..सुनते रहो। आज भी बड़ी संख्या में लोग रेडियो बड़े चाव से सुनते हैं।  इधर प्राइवेट रेडियो चैनल जैसे रेडियो मिर्ची या रेडियो सिटी  स्टेशन भी हर उम्र के सुनने वालों में काफी पॉपुलर हैं। आजकल एक नया शब्द पॉडकास्ट काफी चर्चा में है। सरल शब्दों में समझे तो ऑडियो कॉन्टेंट को पॉडकास्ट कहते हैं। नहीं समझे?  देखिए इंटरनेट और अखबार में हम जो पढ़ते हैं वह टेक्स्ट कॉन्टेंट कहलाता है। इसी टेक्स्ट को पढ़कर अगर हम रेकॉर्ड कर लें तो वह ऑडियो कान्टेंट हो जाता  है। जब कोई अपने फोन में या रेकॉर्डर पर कुछ भी रिकॉर्ड करता है और बाद में  अपने हिसाब से उसे सुनता है तो वही पॉडकास्ट है। पॉडकास्ट,  POD और BRADCAST का संक्षिप्त रूप है। POD यानी  PLAYABLE ON DEMAND और ब्रॉडकास्ट यानि प्रसारित करना। दूसरे शब्दों में कहें तो जब मर्जी करें पॉडकास्ट सुन लिया ।


                   
what is podcasting?
                   


रेडियो और पॉडकास्ट में अंतर



 बस इतना अंतर है कि रेडियो में लाइव प्रसारण और रेकॉर्डिंग दोनों सुनाए जाते हैं। पॉडकास्ट में एक  बार रेकॉर्ड कर लेते हैं और जब मर्जी करें इंटरनेट पर सुन सकते हैं। पॉडकास्ट की तुलना में रेडियो एक महंगा और अपेक्षाकृत जटिल माध्यम है साथ ही रेडियो तक सबकी पहुंच नहीं होती। दरअसल रेडियो में प्रोग्राम तैयार करने वाली टीम होती है और उसमें चंद लोग ही अपना हुनर दिखा सकते हैं।  दूसरी ओर पॉडकास्ट बहुत सरल है। रेडियो में जो सीमाएं हैं वो पॉडकास्ट में नहीं है। हर वो व्यक्ति जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है वह पॉडकास्ट बना सकता है। अपनी प्रतिभा या हुनर को दूसरों को दिखा सकता है। मान  लीजिए ..कोई शख्स कहानी बड़े दिल्चस्प अंदाज़ मे सुनाता है। इसका मतलब यह हुआ कि वो शख्स एक बढ़िया कहानी कहने वाला यानी स्टोरी टेलर हुआ। अब अगर रेडियो के सहारे रहेगा...तो पता नहीं कब नंबर आएगा। वह वीडियो  के माध्यम से भी अपने हुनर को दुनिया के सामने ला सकता है लेकिन वीडियो का माध्यम भी  पॉडकास्ट के मुकाबले अपेक्षाकृत जटिल है।  



कैसे बनाएं पॉडकास्ट?

आज ऐसे बहुत से एप उपलब्ध हैं जिन पर रजिस्ट्रेशन कर आप आसानी से पॉडकास्ट बना और सुन सकते हैं इसके लिए आपके पास स्मार्टफोन या कंप्यूटर है का होना बहुत जरूरी है। एंकर एक ऐसा ही ऐप है जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं। उस पर रजिस्टर कर आसानी के साथ आप जो कुछ भी कहना चाहते हैं उसे रेकॉर्ड कर सकते हैं। एंकर एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिस पर आसानी से पॉडकास्टिंग की जा सकती है। और भी बहुत से एप हैं जिन पर आप पॉडकास्टिंग कर सकते हैं।


पॉडकास्टिंग में संभावनाएँ

भारत में तकरीबन 70 करोड़  इंटरनेट  यूजर्स हैं। हालांकि पॉडकास्ट सुनने वालों की संख्या इतनी नहीं है लेकिन इस बात की पूरी संभावन है कि भविष्य में पॉडकास्ट सुनने वालों की संख्या बढ़ेगी। आज भी कई वेबसाइटें हैं जिन पर कहानियां, इतिहास वगैरहा से संबंधित पॉडकास्ट सुन सकते हैं। पॉडकास्ट बेवसाइटें अच्छा पैसा कमा रही हैं।व्यक्तिगत रूप से अगर कोई पोडकास्टिंग करता है तो वह भी धन कमा सकता है। आप जिस क्षेत्र के भी जानकार हैं उस क्षेत्र की नोलिज रेकॉर्ड कीजिए और दूसरों के साथ शेयर करें। एक बार फेमस हुए नहीं कि आपकी आमदनी शुरू।

मान लीजिए कि मुझे पढ़ाना अच्छा लगता है तो मैं अपने पसंदीदा विषय पर ज्ञानवर्धक जानकारी रेकॉर्ड कर लगातार दूसरों के साथ शेयर कर सकता हूं। धीरे-धीरे मेरी फैन फोलोइंग बढ़ेंगी तो आमदनी भी शुरू हो जाएगी। अगर आप  कविता या शायरी अच्छी लिख और पढ़ या कर सकते हैं उसे रेकॉर्ड कर फेमस   हो सकते हैं।  
 

पॉडकास्ट ही क्यों?


पॉडकास्ट तैयार करना आसान होता है। आप आसानी से अपनी  बात को रेकॉर्ड कर दूसरों के साथ शेयर कर सकते हैं।  बस आपको उच्चारण साफ़ हो तो और बेहतर। भाषा की जानकारी आपका काम और आसान कर सकती है। हम सब जानते   हैं किसी जानकारी या कहानी  को पढ़ने या देखने की अपेक्षा बहुत सारे लोग सुनना पसंद करते हैं। दादी-नानी की कहानियां तो हम सब सुनते आए हैं न। जो मज़ा दादी-नानी की कहानियों में आता था वही मैजिक आप पॉडकास्ट के जरिए पैदा कर सकते हैं। 



सभी ब्लॉगर, ब्लोगिंग के साथ-साथ पॉडकास्टिंग कर सकते हैं। जिन विषयों पर आप ब्लॉग लिखते हैं। उन्हीं विषयों पर आप पोडकास्टिंग कर सकते हो। धन्यवाद।


                                          -वीरेंद्र सिंह
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16 comments:

  1. महत्वपूर्ण जानकारी से परिपूर्ण लेख।
    हार्दिक बधाई - डाॅ शरद सिंह

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    1. हार्दिक धन्यवाद डॉ. शरद। आगे भी आती रहिएगा।

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  2. सादर नमस्कार ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (29-12-20) को "नया साल मंगलमय होवे" (चर्चा अंक 3930) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा


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    1. हार्दिक धन्यवाद कामिनी जी। चर्चा अंक पर अवश्य आऊंगा।

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  3. पॉडकास्ट के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी लिए प्रभावशाली लेख। नववर्ष हेतु बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं

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    1. धन्यवाद मीना जी। आपको भी नववर्ष पर बहुत-बहुत बधाई।

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  4. इतनी लाभदायक जानकारी देने के लिए हृदय से धन्यवाद ।

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    1. शुभा जी धन्यवाद। आगे भी आती रहिएगा।

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  5. लाभदायक पॉडकास्ट के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी लिए धन्यवाद माननीय।
    अशेष शुभकामनाओं सहित।
    सादर।

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    1. सधु जी हार्दिक धन्यवाद। आपको भी शुभकामनाएं।

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  6. पॉडकास्ट के बारै में महत्वपूर्ण एवं लाभदायक जानकारी... ।
    नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं।

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    1. सुधा जी हार्दिक धन्यवाद। आपको भी नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएँ।

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  7. डिजिटल और डिजिटल में पौड कास्ट ....
    अच्छी जानकारी साझा की है इस माध्यम की ... नव वर्ष की बहुत शुभकामनायें ...

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    1. हार्दिक धन्यवाद नासवा जी। कई दिनों बाद इस ब्लॉग पर आना हुआ है आपका।

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  8. धन्यवाद आपका। आगे भी आती रहिएगा।

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