Wednesday, February 17, 2021

धंधे में मंदी से बचने का 'उल्लू बनाओ' उपाय!

                          

 पढ़े.. काम जमाने का अचूक उपाय!
 कैसे गुल्लू भी लोगों का उल्लू बनाएं!

                                                  

दिल्ली- नोएडा में भीड़ृ-भाड़ वाली जगहों या किसी मॉल के सामने कलकत्ता या बनारस का ड्राइ पान बेचने वाले की शक्ल पर कभी मत जाना। उसकी अक्ल की दाद देना और  दबाकर पान बेचने के लिए लगाई तरकीब को नमस्कार करना। पान वाले के पास में ही हैदराबाद की बिरयानी, मुंबई की भेलपूरी- सेवपूरी- झालमूड़ी, मद्रासी मैथा और गुजरात का शहद आमला  बेचने वाले उसी तरकीब के दम पर दमदार कमाई करते हैं।  इन्होंने अपने धंधे का चलाने की जो तिकड़म भिड़ाई है उसकी काट तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं मिलती। इसलिए इनको सम्मान मिलना चाहिए। धंधे को कामयाब बनाने की इनकी असाधारण समझ पर शोध होना चाहिए। जिस व्यक्ति ने पहली बार इस तरह के विचार को अपनाया था उसकी खोज-खबर लेनी चाहिए ताकि उसका पर्याप्त सम्मान किया जा सके। "धंधे में कामयाबी का गुरु" जैसे खिताब से उसे नवाजा जा सके। बिजनिस में रातों-रात रिकॉर्ड तोड़ कामयाबी के लिए आतुर तिकड़मबाज उसके चरणों की धुली अपने माथे पर लगा सके।  अगर वो अब इस दुनिया में न हो तो उसके परिजनों में से जो मिले उनका सम्मानित करना चाहिए। और हां  कामयाबी उनका ये उपाय हर जगह के लिए है।


The Perfect Selling Art
सांकेतिक चित्र
The perfect selling trick
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 जीने के लिए कोई न कोई धंधा करना पड़ता है और उस धंधे को चलाना पड़ता। धंधा अगर मंदा  हो जाए तो तमाम तरह के  शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और  सामाजिक कष्ट पीड़ा देते हैं। इसलिए  धंधा कभी मंदा न पड़े इसके लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। पान तो पान ही है। अगर आप उसे पान के नाम से बेचोगे तो खाने वाले को कुछ स्पेशल नहीं लगेगा। स्पेशल नहीं लगेगा तो पान नहीं खाएगा। नहीं खाएगा तो  धंधा चौपट हो जाएगा।  लेकिन अगर ग्राहक को  बताया जाए कि पान बनारस या कलकत्ता का है तो झपट के चबा डालेगा। महंगा हो तब भी।  बिरयानी वाला अगर हैदराबाद की बिरयानी कहकर न बेचे तो खाने वाला समझ जाएगा कि इसकी बीबी ने ही बनाई है और बहुत सारे लोग तो ये मान ही नहीं सकते कि बीबी भी बढ़िया बिरयानी बना सकती है। रेट कम कर दिये तब भी नहीं। सबका मानना है कि बिरयानी तो हैदराबाद वाले ही बनाते हैं। इसलिए  जब बिरयानी वाले की बीबी ने अपने छोटे-छोटे बच्चों की सुबह की नौकरी करने के साथ-साथ  बड़ी मुश्किल से बिरयानी तैयार की तो बेचने को ले जाने से पहले विक्रेता चतुर सिंह ने ठेले पर लिखवा दिया हैदराबाद की मशहूर बिरयानी। अब खाने वाले ये न पूछेगें कि बिरयानी किसने बनाई और किस हाल में? ठेले पर लिख देने भर से बिरयानी में उन्हें हैदराबाद का स्वाद आने लगता है। जैसे पान में बनारस और कलकत्ता के पान का स्वाद आ जाता है।  इसका पता लगाने की फुरसत किसके पास है कि पान या बिरयानी में वास्तव में कहां का स्वाद है। अगर फुरसत हो भी तो किसे पड़ी है।

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The Trick of Getting success in selling
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पड़ोस में एक मास्टर जी बहुत दिनों से कह रहे थे कि मैं अंग्रेज़ी बोलना सीखाता हूं। अपने घर के बाहर एक और मोहल्ले में जगह-जगह बोर्ड लगवा दिया कि  किसी भी उम्र के महिला-पुरुष, कामकाजी, बेकार, कॉलिज-गोइंग लड़के-लड़कियां मुझसे अंग्रेज़ी सीख सकते हैं। फीस भी कम लूंगा। लोगों ने पूछा तो जरूर लेकिन फीस न जमा की। मास्टर जी बेचैन हो उठे। पास के शहर में अंग्रेजी बोलना सीखाने वालों पर  गौर  किया तो ता चला कि उनके मोहल्ले का ही 10 साल पहले तीसरी बार में 10 वीं पास करने वाला गुल्लु ,  ब्रिटिश इंग्लिश सिखा रहा है। उसके छात्र बड़े प्यार और सम्मान से उसे गुलाब सर कहते हैं। सीखने वालों  की भीड़ लगी हुई है। मास्टर जी को पसीना आ गया। जो गुल्लू ढंग से हिंदी न बोल पाता हो वो ब्रिटिश अंग्रेज़ी सिखा रहा है। मास्टर जी के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। दौड़कर गुल्लू की कामयाबी का राज जानने के लिए उसके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए! गुल्लू ने मास्टर जी या यों कहिए कि किसी भी मास्टर को पहली बार बड़े ध्यान से सुना! सुनने के बाद मुस्कराया। उसकी कुटिल मुस्कान बता रही थी कि उसे पता चल गया है कृपा कहां रुकी पड़ी है। गुल्लु ने उल्लू बनाने का तरीका बताते हुए कहा कि मास्टर जी ऐसे अंग्रेज़ी कोई न सीखेगा! अब से यह कहना शुरू कर दो कि आप अमेरिकन,  कैंब्रिज, ऑक्सफर्ड या हॉवर्ड की अंग्रेज़ी सिखाते हो। फिर देखो! मास्टर जी ने उसी दिन कहना शुरु कर दिया कि आज से वो केवल अमेरिकन अंग्रेज़ी ही सिखाएंगे। रातों-रात मास्टर जी के दिन फिर गए। उन्हें मनमाफिक कामयाबी मिली। गुल्लू का उपाय अचूक निकला। 


                                      -वीरेंद्र सिंह

4 comments:

  1. बहुत अच्छी पोस्ट वीरेन्द्र जी । यह कोई व्यंग्य नहीं, जीवन की सच्चाई है । विक्रयकला है यह । जो बिकेगा नहीं, वो चलेगा कैसे ?

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद आपका सर। जी।

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  2. जो दिखता है..वही बिकता है..के तर्ज़ पर बहुत से गोरखधंधे लोग चला रहे और लोग फंस भी रहे..सटीक प्रश्न उठाता लेख..

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  3. बहुत-बहुत धन्यवाद जिज्ञासा जी। सादर ।

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