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Friday, January 22, 2021

जन्नत की हूर भी तेरे पैरों की धूल है


Ghazal on a stunning beauty. Beautiful girl.
सांकेतिक चित्र


शिक़वे शिकायतों की बातें फ़िज़ूल हैं,

हर रंग मेरे महबूब का मुझे क़ुबूल है।

ख़ता कोई भी तुमसे  हो नहीं सकती,

दामन पे तेरे दाग़ ज़माने की भूल है।

 धरती पे न होगी तेरे हुस्न की मिसाल,

 जन्नत की हूर भी तेरे पैरों की धूल है।

देखे तुम्हें ये चांद  इजाज़त नहीं उसे,

है तेरी सुगंध मेरी बस तू मेरा फूल है।

ये वादा है इशारों पे तेरे जान भी देंगे

  तोड़े नहीं वादा कभी अपना उसूल है।


-वीरेंद्र सिंह

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