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Friday, February 22, 2019

सही नहीं है दोहरा रवैया


पुलवामा हमले के बाद  केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के विरुद्ध जो फैसले लिए हैं वे तो पहले भी लिए जा सकते थे। पाकिस्तान को दिया गया मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा हमने पहले ही वापस क्यों नहीं लिया था? केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ट्वीटर पर लिख रहे हैं कि भारत सरकार बांध बनाकर और नदियों की धारा पंजाब और जम्मी-कश्मीर की तरफ मोड़कर  अपने हिस्से का पानी रोकेगी। सवाल उठता  है कि अब तक आपने ऐसा क्यों नहीं किया था? पाकिस्तान की हरकतों से हम तंग आ चुके हैं। भारत के विरुद्ध सक्रिय आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में पाकिस्तान ने कभी ईमानदार कोशिश नहीं की। उल्टे उन्हें बढ़ावा ही दिया है।  उसे दंडित करने के बार-बार धमकी दी जाती है। लेकिन उन धमकियों पर अमल की बात तब होती है जब कोई बड़ा आतंकवादी हमला हो जाता है। जम्मू -कश्मीर को स्पेशल दर्जा देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग लगातार हो रही है। बीजेपी ने भी कई बार इस मांग को दोहराया है। तो फिर इसे हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं होती? भारत सरकार इस अनुच्छेद को हटाने के व्यापक विचार-विमर्श क्यों नहीं शुरू करती? कहीं ऐसा तो नहीं कि अनुच्छेद 370 के मामले में भी बीजेपी पलटी मार रही है। राम मंदिर निर्माण और समान नागरिक संहिता के मुद्दों पर भी बीजेपी कुछ ख़ास नहीं कर सकी है। 

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पुलवामा घटना के बाद देश के कुछ स्थानों से कश्मीरी छात्रों के साथ बदसलूकी या मारपीट के मामलों पर जम्मू एंड कश्मीर के टॉप नेताओं की बयानबाजी काबिले गौर है। ख़ासकर, नैशनल कान्फ्रेंस के नेता और जम्मू एंड कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद और का दोहरा रवैया ही उजागर होता है। उमर अब्दुल्ला का कहना है कि उनके राज्य के छात्रों पर हमला करने वालों को नई दिल्ली का आशीर्वाद प्राप्त है। उमर को  इस बात की पीड़ा है कि पीएम मोदी ने इन छात्रों पर हमले की निंदा नहीं की। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि ऐसी घटनाएं कश्मीरी छात्रों को दूर करने का काम करेंगी।

उमर अब्दुल्ला साहब और गुलाम नबी आज़ाद जी,  बेकसूर कश्मीरी छात्रों पर हमला वाकई निंदनीय है और कोई भी समझदार भारतीय इसका समर्थन नहीं करेगा। वे भी अपने ही देश के लोग हैं लिहाजा ऐसा नहीं होना चाहिए। लेकिन एक सवाल का जवाब आपको को भी देना चाहिए कि जब कुछ कश्मीरी छात्र आतंकवादियों के समर्थन में हरकतें कर रहे थे तो क्या आपने उन्हें ऐसा नहीं करने की सलाह दी थी?  पूरा देश जब घृणित और  कायराना आतंकी घटना में  देश पर  जान वारने वाले वीरों के बलिदान पर शोक मना रहा था कई जगहों पर बहुत से  कश्मीरी छात्र-छात्राओं ने देश विरोधी और पाकिस्तान के साथ-साथ आतंकवादियों के समर्थन में हरकतें की। कश्मीर में आये दिन भारत विरोधी नारेबाजी होती रहती है। क्यों कभी आपने सख़्ती से ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की? क्यों आपने कभी दिल से केंद्र सरकार के सुर में सुर नहीं मिलाया? आज जब लोगों का ग़ुस्सा फूट रहा है तो आप को दर्द हो रहा है? सच तो ये है कि आप जैसे नेताओं के पक्षपाती रवैये से जनता तंग आ गई है। इसलिए जब भी आप मुंह खोलते हैं तो आपको विरोध का सामना करना पड़ता है। कोई आपकी सुनने को  तैयार ही नहीं होता। अपनी ऐसी हालत के लिए आप खुद जिम्मेदार हैं। फिलहाल बेहतरल यही होगा कि बयानबाजी करते वक्त संयम से काम लें।

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दिल्ली के मुख्यमंत्री और आआपा के मुखिया अरविंद केजरीवाल इस बात से बेहद हताश और निराश हैं कि कांग्रेस उनसे दिल्ली में गठबंधन करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। बकौल केजरीवाल वो कांग्रेस से गठबंधन को कह-कह कर थक गए हैं। पिछले कुछ समय से वो ये भी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने दिल्ली में पिछले चार सालों में जितना काम किया है उतना 70 सालों  में नहीं हुआ। 

अब सवाल उठता है कि जब आपने इतना काम किया है तो आपको दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों के जीतने के लिए कांग्रेस का साथ क्यों चाहिए? कांग्रेस के साथ जाने की आपकी ललक आपके उस दावे को कमज़ोर करती है जिसमें आप कहते हैं कि आपने  पिछले 4 सालों में 70 सालों से भी ज्यादा काम किया है। आप और आपके समर्थक ये कह सकते हैं कि मसला लोकसभा चुनावों का है इसलिए कांग्रेस के साथ जाना चाहते हैं। इस स्थिति में आपके विरोधी भी यहीं कहेंगे कि आप तो कांग्रेस को भ्रष्ट्राचार के मुद्दे पर पानी पी-पी कर कोसते थे।अब क्या हुआ जो उसी कांग्रेस के साथ मिलने को आतुर हो?