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Saturday, July 24, 2021

राहुल जी पीएम बनेंगे!

ट्वीटर पर ट्रेंड कर रहे दो मुद्दों पर एक नज़र..



भारत में राजनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा चलती ही रहती है। हालाँकि बहुत से लोग इससे बचते भी हैं। भारत में जीवंत लोकतंत्र है इसलिए विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के लोग अपनी समझ और पसंद के हिसाब से  अपनी बात रखने से हिचकते नहीं है। वैसे तो हमारे चारो तरफ कहीं न कहीं राजनीति और नेताओं पर गरमा-गरम  बहस चलती रहती है। लेकिन उसका पता सबको नहीं चल पाता। जहाँ तक सोशल-मीडिया पर होने वाली  बहस का सवाल है तो उसकी पहुँच बड़े वर्ग तक होती है। और अगर बहस दिलचस्प हो तो उसकी चर्चा मुख्यधारा की मीडिया से लेकर ऑनलाइन न्यूज पोर्टलों तक पहुँच जाती है।  ट्वीटर से हम सभी परिचित हैं। इस पर रोज कई छोटे-बड़े मुद्दे ट्रेंड करते हैं। ट्रेंड से मतलब  हैशटैग के साथ किसी विचार( जैसे-   #राहुल-जी-पीएम-बनेंगे) के पक्ष या विपक्ष में  हज़ारों-लाखों  लोग ट्वीट करते हैं जिसे उस  विषय का ट्रेंड करना कहा जाता है। लोग अपनी राय रखते हैं कभी-कभी गंदी-गंदी गालियों का प्रयोग होता है। लेकिन  एक बात तो है कि जो विषय भी ट्रेंड करता या कराया जाता है उस पर आए ट्वीट पढ़कर काफी कुछ नया जानने को भी मिलता है। मुद्दे विशेष पर तमाम देशवासियों की राय जानने को मिलती है। मैं भी आज आपको आज ट्रेंड हुए दो मुद्दों पर लोगों की राय से अवगत कराना चाहता हूंँ।

24 जुलाई 2021 के दो ट्रेंड

24 जुलाई 2021 पर ट्रेंड कराया गया राहुल जी पीएम बनेंगे!


24 जुलाई 2021 को ट्वीटर पर जो मुद्दें ट्रेंड कर रहे थे उनमें से दो मुझे काफी दिलचस्प लगे। दरअसल इन पर आए ट्वीट काफ़ी दिलचस्प लगे। आप भी पढ़ें। सबसे पहले देखते हैं कि राहुल गांधी के समर्थकों और उनके विरोधियों की राहुल गांधी के पीएम बनने या न बनने को लेकर क्या राय है।  दरअसल  #राहुल-जी-पीएम-बनेंगे  ट्रेंड कराया जा रहा था(जी हाँ सियासी पार्टियाँ और उनके समर्थक इस तरह के कारनामे करते रहते हैं)। राहुल गांधी के समर्थक उनके पक्ष और विरोधी उनके विपक्ष में दिलचस्प दलील रख रहे थे। 

राहुल गांधी के समर्थकों की दलील   


कांग्रेस समर्थकों  का मानना है कि चूँकि राहुल ने किसानों और गरीबों की की आवाज उठाई है, महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं को रोजगार की बात की है। उन्होंने देश में आर्थिक सुधारों की भी बात की है इसलिए राहुल गांधी देश के लिए महत्वपूर्ण हैं। एक अन्य यूजर को लगता है कि राहुल गांधी देश की वास्तविक आवाज है। राहुल समर्थकों ने मोदी समर्थकों  पर मीम शेयर किया।


राहुल के समर्थन में ट्वीट
                                                     


राहुल समर्थक
                                                         
      'भक्त' का होगा ऐसा हाल!
                                

कांग्रेस विरोधी भी कहाँ पीछे रहने वाले थे। उनके विचारों को भी जान लीजिए।

अच्छा जी!


ऐसा क्या?


वहीं कुछ भाई लोग ममता बनर्जी और तारक मेहता के उल्टा चश्मा वाले को पीएम पद का बेहतर दावेदार बता रहे  थे।


जोश आ गया सच्ची में!

ये मुझे मरवाएगा!


ये तो हुई एक राहुल गांधी को पीएम बनाने वाले ट्रेंड की बात। अब एक और ट्रेंड की बात करते हैं। हाल ही  में  बीएसपी प्रमुख सुश्री मायावती ने ऐलान किया था कि वो ब्राह्मणों समाज को साधने के लिए ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन करेंगी। बस फिर क्या था..कुछ लोगों को शायद यह अच्छा नहीं लगा या फिर उनके राजनीतिक विरोधियों ने कोई चाल चली कि ट्वीटर पर  #BSP_मिशन_भूल_ गई ट्रेंड करा दिया। इस ट्रेंड के पक्ष में ट्वीट पढ़कर लगता है कि वो बीएसपी   बहुजन समाज के हितों से समझौता कर  अपने मिशन से दूर हट गई है। हालाँकि कुछ लोगों ने बीएसपी का समर्थन भी किया।


जे बात है!



अपना-अपना राग


बड़ा ग़ुस्सा है भाई!

आँखे खोलो!

जनता समझ गई?





तो यह थी ट्वीटर पर ट्र्रेंड कर रहे दो मुद्दों पर लोगों  मिली-जुली राय। आपको यह प्रस्तुति कैसी लगी इसका पता तो 
आपकी प्रतिक्रियाओं के बाद ही लगेगा। लेकिन उम्मीद यही है कि आपको भी लोगों के रचनात्मक ट्वीट पसंद आएँगे। एक बात  गौर करने वाली है कि लोग अपनी राय  बेखौफ सामने रखते हैं जो कि एक अच्छी बात है। बहस,  वाद-विवाद के बगैर तो लोकतंत्र की कल्पना ही नहीं की जा सकती। इसलिए मुझे  ऐसी बहस (भले ही प्रोयजित है) और तर्कबाजी बुरी नहीं लगती। बस थोड़ा सा इतना ध्यान जरूर रखा जाना चाहिए कि शब्दों की मर्यादा न टूटे(जो कि अक्सर टूट जाती है)। फेक़ न्यूज जितना हो सके बचे। झूठे तर्क कतई न रखें, विरोध जमकर किया जाए लेकिन नफ़रत न की  जाए जैसा कि आजकल देखने में आता है। बाकी तो जो है सो है। धन्यवाद।


   -वीरेंद्र सिंह

Thursday, February 21, 2019

मेगा पोल के दिलचस्प नतीजे!

देश की एक बेहद लोकप्रिय न्यूज वेबसाइट ने 2019 के आम चुनाव के संदर्भ में एक मेगा पोल कराया था। ये पोल 11 फरवरी,2019  से 20 फरवरी 2019 तक चला। ये मेगा पोल  मोदी सरकार के कामकाज, देश का अगला पीएम,  राहुल गांधी की लोकप्रियता और आम चुनाव में राफेल बवाल का असर जैसे मुद्दों को लेकर था। इस पोल में केवल ऑनलाइन लोगों ने भाग लिया था। वेबसाइट का दावा है कि लगभग 2 लाख लॉग-इन यूजर्स की राय को ही इसमें शामिल किया गया है। जाहिर है पोल के नतीजे सभी भारतीय मतदाताओं की मन की बात नहीं है। 21  फरवरी 2019 यानी आज इस पोल के नतीजे सामने आए। इस पोल के नतीजे काफी हद तक चौंकाने वाले भी हैं। 

पोल से साफ़ पता चलता है कि भारत के पीएम नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की लोकप्रियता अभी भी बनी हुई है। लगभाग 84 फीसदी(83.89%) लोग मोदी जी को ही देश के अगले पीएम के रूप में देखना चाहते हैं। केवल 8.33 फीसदी लोगों ने पीएम के रूप में राहुल गांधी को चुना। कांग्रेस के दृष्टिकोण से ये नतीजा बेहद निराशाजनक है।

मोदी सरकार का कार्यकाल लोगों को कैसा लगा?  59.51 % ने  इसे बहुत बढ़िया कहा तो 22.29 प्रतिशत ने बढ़िया बताया। लगभग 8 फीसदी ने औसत तो तकरीबन 10 फीसदी ने इस खराब बताया


महज 24.26 फीसदी लोगों को ही लगता है कि मोदी सरकार में अल्पसंख्यक अपने आप को ज्यादा असुरक्षित महसूस करते हैं। साढ़े 65 फीसदी से भी ज्यादा लोगों को ऐसा नहीं लगता। 10 प्रतिशत से कुछ ज्यादा ने माना कि वे इस विषय पर कुछ नहीं कह सकते।

आगामी लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा क्या होगा?  इसके जवाब में 40 फीसदी से भी ज्यादा ने रोजगार को सबसे बड़ा मुद्दा माना। लगभग 22 फीसदी को किसानों का संकट सबसे बड़ा मुद्दा लगा। 23 फीसदी ने किसी अन्य मुद्दे को सबसे बड़ा मुद्दा माना। केवल 10.16 फीसदी ने राम मंदिर निर्माण को सबसे अहम मसला माना।

क्या राफेल विवाद से एनडीए को लोकसभा चुनाव में नुकसान होगा? लगभग 74 फीसदी से भी ज्यादा लोगों ने नहीं में जवाब दियामहज साढ़े सत्रह फीसदी लोगों ने हां में उत्तर दिया। 

आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ क्या बीजेपी को मिलेगा ? इस सवाल का जवाब 72 फीसदी से भी ज्यादा ने हां में दिया। 15 %  से कुछ ज्यादा ने ही न में उत्तर दिया।

आम चुनाव के बाद सरकार गठन के लिहाज से कैसी तस्वीर होगी?  इसकी प्रतिक्रिया में 83 प्रतिशत से भी ज्यादा लोगों ने मोदी के नेतृत्व में एनडीए की वापसी की भविष्यवाणी की है। लगभग साढे नौ प्रतिशत ने राहुल के नेतृत्व में गठबंधन सरकार का अनुमान लगाया है। कांग्रेस के नजरिए से ये बात भी कोई उत्साहजनक नहीं है। 

34 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने ग़रीबों के लिए योजनाओं के विस्तार को मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि माना है। तो वहीं 29 फीसदी ने जीएसटी, साढ़े अठारह प्रतिशत से भी ज्यादा ने  स्वच्छ भारत और लगभग 18 फीसदी ने सर्जीकल स्ट्राइक को मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि माना है।

मोदी सरकार की सबसे बड़ी असफलता क्या रही? 35.72 फीसदी लोगों ने  राम मंदिर निर्माण में कोई प्रगति नहीं होना को बताया। लगभग साढ़े 29 प्रतिशत ने रोजगार सृजन न होना को सबसे बड़ी असफलता माना है। साढ़े 13 प्रतिशत ने नोटबंदी को भी मोदी सरकार की विफलता माना ।

एक बेहद दिलचस्प सवाल ये पूछा गया कि 2014 के मुकाबले क्या राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़ी है? 63 प्रतिशत से भी ज्यादा ने ये माना कि  ऐसा नहीं है जबकि 31 फीसदी से भी ज्यादा ने हां में जवाब दिया।लगभग 6 फीसदी कुछ नहीं बता सके। 


ये स्पष्ट है कि ये नतीजे सभी भारतीय मतदाताओं की राय नहीं है।  इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि  राय जाहिर करने वाले मतदाता  काफी बड़े वर्ग का प्रतिनिधत्व करते होंगे।