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Monday, March 22, 2021

स्मार्टफोन और कंप्यूटर के दुष्प्रभावों से आँखों के बचाव के टिप्स

आँखे हमारे शरीर का सबसे अनमोल अंग है। इसलिए इनकी सेहत का ख्याल रखना हमारी प्राथमिकता  में होना चाहिए!  स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर के अत्यधिक इस्तेमाल से हमारी आँखों  पर बहुत बुरा असर पड़ता है। अगर हम कुछ बातों का ध्यान रखें तो स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर के दुष्प्रभावों से हम अपनी आँखों को आसानी से बचा सकते हैं।  सबसे पहले स्मार्टफोन इत्यादि के इस्तेमाल से हमारी आँखों पर पड़ने वाले असर की बात करते हैं।  एक अनोखी प्रेम कहानी प्रेमबाण

save your precious eyes from laptops, smartphones and computers
सांकेतिक चित्र



 स्मार्टफोन से होने वाले दुष्प्रभाव के कारण:

स्मार्टफोन की स्क्रीन से नीली रोशनी (Blue Light) निकलती है। यह रोशनी अत्यधिक उर्जा वाली होती है और आँखों के रेटिना पर असर डालती है। इतना ही नहीं नीली रोशनी हमारे सोने-जगने के चक्र को भी प्रभावित करती है। सोने-जगने की प्रक्रिया  हमारे मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती है। इससे स्पष्ट है कि यह हमारे मस्तिष्क को भी प्रभावित करती है। पढ़े मजेदार व्यंग्य अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे


save your eyes from computer, laptops and smartphones.
सांकेतिक चित्र



क्या-क्या दुष्प्रभाव होते हैं?


1-आँखों में जलन, चुभन और और सूखापन (जिसे अंग्रेज़ी में ऑक्युलर ड्राइनैस भी कहते हैं) होना
2-आँखों में पानी आना, खुजली होना और सिर में दर्द होना
3- देखने में धुंधला दिखाई देना
4- आँखों में तनाव और थकान होना
5- धीरे-धीरे नज़र कम होते जाना

दुष्प्रभावों से बचने के उपाय या टिप्स


स्मार्टफोन, लैपटॉप और कम्यूटर के चलते आँखों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचने के लिए हमें निम्न बातों पर ध्यान रखना होगा:


1-  सबसे पहले तो अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन पर ब्लू लाइट फिल्टर को ऑन करें। स्क्रीन की चमक यानी ब्राइटनैस को कम रखें। 

2- स्मार्टफोन पर काम करते वक्त निरंतर पलक झपकाते रहें। थोड़ी--थोड़ी देर  बाद स्मार्टफोन से नज़र हटाकर  कुछ दूरी पर देखा करें। पढ़े मजेदार व्यंग्य

3- फोन को इस्तेमाल करने का सही तरीका अपनाएँ।

4- सीधे बैठकर फोन को अपनी आँखों से थोड़ी दूर रखकर प्रयोग करें।

5-  फोन की स्क्रीन पर फॉन्ट साइज  बड़ा रखें। इससे आँखों पर कम ज़ोर पड़ता है।

6- हो सके तो स्मार्टफोन की लत से बचे। एक दिन में 2-3 घटें से ज्यादा इसका प्रयोग न करें तो बेहतर हो।
7- सप्ताह में 1 या 2 दिन डिजिटल उपवास करें।  डिजिटल उपवास से मतलब होता है कि आप किसी निश्चित दिन या समय पर स्मार्टफोन या लैपटॉप का बिल्कुल इस्तेमाल न करें।

8- सोने से कम से कम 2 घंटे पहले स्मार्टफोन का प्रयोग बंद कर दें। इससे आपको नींद आने में  भी आसानी होगी और आँखों को भी आराम मिलेगा।पढ़े एक प्रेरणास्पद कविता

9-  नियमित तौर पर अपनी आँखों  का चैकअप नेत्र रोग विशेषज्ञ से कराएँ उसकी सलाह माने।


      कंप्यूटर और लैपटॉप प्रयोग करते हुए भी कुछ सावधानियाँ अवश्य बरतनी चाहिए:

1-  स्क्रीन की चमक यानी उसकी ब्राइटनैस को कम रखें।
2- अपने स्क्रीन पर एंटी ग्लेयर स्क्रीन का प्रयोग करें।
3- चश्में पर एंटी रिफ्लेक्टिंग कोटिंग कराएँ।
4- हर 15-20 मिनट  बाद स्क्रीन से आँख हटाकर 15 से 20 बार अपनी पुतिलयों को झपकाएँ।
5- लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करते वक्त आँखों में किसी भी प्रकार की परेशानी या अनइजीनैस फील करते हैं तो तुरंत  अपने नेत्र चिकित्सक से मिलें।
6- सलाह यह भी है कि अगर आप रोजाना इन लैपटॉप या कंप्यूटर का इस्तेमाल 6 से 8 घंटे या उससे ज्यादा करते हैं तो आप को अपनी आँखों का चैकअप अवश्य कराना चाहिए। भले ही आप अभी किसी भी प्रकार की दिक्कत का अनुभव नहीं कर रहे हों। 

यह भी पढ़े...ऑनलाइन खरीदारी से पहले पढ़े ..... ऑनलाइन खरीदारी के लिए महत्वपूर्ण टिप्स

उपरोक्त बातों के अलावा अपने खान-पान पर नज़र रखें। स्वस्थ खान-पान की सलाह सभी डॉक्टर देते हैं। आँखो के लिए विटामिन ए युक्त आहार को अपने भोजन में शामिल करें।  रोजाना व्यायाम यानी एक्सरसाइज  जरूर करें। पढ़े दो पत्नियों की कथाएँ

अधिक और बेहतर जानकारी के लिए आँखों के डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।

                                           


Sunday, February 7, 2021

ऑनलाइन खरीदारी से पहले बरते ज़रूरी सावधानियां

ऑनलाइन शॉपिंग से पहले ज़रूर जाने लें ये बातें



कोरोना काल में हमारे बहुत सारे काम ऑनलाइन होने लगे हैं। हालांकि कोरोना से पहले भी ये काम ऑनलाइन होते थे लेकिन अब अधिक मात्रा में होने लगे हैं। वो चाहे खाना मँगवाना हो या फिर पेमेंट करना हो सब ऑनलाइऩ हो रहा है और ऑनलाइन मार्केट ज़ोर पकड़ रहा है। ऑनलाइन शॉपिंग का चलन भी बहुत ज़ोरों पर है। कोरोना के अलावा भी  इसके बहुत से कारण हैं। 




क्या है ऑनलाइन शॉपिंग?  


जब हम अपनी ज़रूरत का सामान  ऑनलाइन चुनते हैं और उसका ऑनलाइन पेमेंट करते हैं और एक निश्चत समय सीमा में वो सामान हमारे पास पहुंच जाता है तो इसे ऑनलाइन शॉपिंग कहते हैं। 

ऑनलाइन शॉपिंग का खरीदारी का चलन बढ़ता ही जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का इ कॉमर्स का बाज़ार है। इसमें कोई शक़ नहीं कि आने वाले दिनों में ऑनलाइन खरीदारी का क्रेज और बढ़ेगा। भारतीय ग्राहक मोबाइल फोन और अन्य ज़रूरी चीजें ऑनलाइन खरीदना पसंद करते हैं। 

ऑनलाइन ख़रीदारी के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुक़सान भी हैं?


ऑनलाइन शॉपिंग के फ़ायदे


1- इसमें समय की बचत होती है।
2- कहीं आना-जाना नहीं पड़ता है।
3- अच्छी क्वालिटी की कई वैराइटियों में चुनने की सुविधा रहती है।
4- पसंद नहीं आने पर वस्तुओं  को लौटाया भी जा सकता है।
5- डिलीवरी के समय पेमेंट करने की सुविधा भी मिलती है।
6- कई बार कुछ सामान किसी बड़ी रिटेल की दुकान की अपेक्षा सस्ता भी मिल जाता है।
7- कुछ  बैंकों के क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर अतिरिक्त छूट मिल जाती है।



ऑनलाइन शॉपिंग के नुक़सान


ऑनलाइन शॉपिंग के नुक़सान भी कम नहीं है।


1- हम ऑनलाइन देखकर आइटमों को चुनाव करते हैं जिससे कई बार प्रोडक्ट ऐसा नहीं निकलता जैसा देखने पर 
    लगा था।
2- ख़ासकर रंग के मामले में धोखा हो जाता है। जो रंग ऑनलाइन अच्छा लगता है वही रंग का आइटम जब    
     आपके हाथों में आता है तो उतना अच्छा नहीं लगता।
3- कई बार प्रोडक्ट के स्थान पर कुछ और ही पकड़ा दिया जाता है यानी  धोखाधड़ी हो जाती है।
4- जिस वेबसाइट से ख़रीदारी करते हैं उस पर संबंधित प्रोडक्ट की रेटिंग होती है। उस प्रोडक्ट को पहले ख़रीद        चुके ग्राहकों की मिली -जुली प्रतिक्रियाएं होती हैं। कोई उसे सही बताता है तो कोई उसे ख़राब। ऐसे में ये तय          करना बड़ा मुश्किल हो जाता है कि संबंधित प्रोडक्ट ख़राब है या वाकई में ख़रीदा जा सकता है।
5- इससे भी बड़ी बात यह है कि सभी प्रोडक्ट के बारे में कन्फ्यूजिंग राय होती है। ऐसे में प्रोडक्ट यानी आइटम का       चुनाव करना  मुश्किल होता है।
6-  ऑनलाइन पेमेंट करने में अक्सर पैसा कट जाता है जबकि ई-कॉमर्स कंपनी के खाते में पैसा नहीं पहुंच पाता।  
      ऐसे में कटा हुआ पैसा वापस आने में 3-4 दिन और कभी-कभी ज्यादा दिन भी लग जाते हैं।
7-   जिस आइटम का पेमेंट एडवांस हो चुका हो और उसको हम लौटाना चाहें तो लौटा तो सकते हैं लेकिन उसका 
      रिफंड मिलने में एक सप्ताह से भी ज्यादा का समय लग जाता है। कभी-2 तो रिफंड आपके बैंक अकाउंट में           न आकर ई-कॉमर्स कंपनी अपने ऑनलाइन पेमेंट कार्ड में जमा करा देती है जिसे आप अगली शॉपिंग में               इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऑनलाइन शॉपिंग से पहले इन  बातों को ध्यान में रखें:-


1- आप जिस आइटम को ख़रीद रहे हैं अगर उसका रंग आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है तो कोशिश करिए कि उसे पास की रिटेल दुकान से ख़रीदें। थोड़े बहुत पैसे भले ही ज्यादा लग जाए लेकिन सामानआपकी मनपसंद  मिलेगा। ऑनलाइन में कई बार जिस रंग का सामान दिखाते हैं उसकी डिलीवरी नहीं करते। जो काफी निराशाजनक हो सकता है। रिटर्न की प्रक्रिया भी थोड़ा सा परेशान करने वाली  होती है।


2- आप ऑनलाइऩ सामान मंगवाते वक्त ध्यान रखिए कि अगर सामान वापस करना पड़ा तो अगले दिन          ही कंपनी का बंदा सामान लेने आ पाएगा। यानी आपके पास इतना वक्त होना चाहिए। 


3- सामान काऑर्डर करने से पहले संबंधित कंपनी के कस्टमर केयर से यह ज़रूर जान लें कि अगर  
   आइटम वापस करना पड़ा तो डायरेक्ट उसका रिफंड ही मिलेगा या आइटम रिप्लेस किया जाएगा।
   दरअसल होता यह है कि बहुत से आइटम अगर ख़राब निकल जाए तो उसकी कंपनी उस आइटम को 
  पहली बार में लौटाने की बजाय उसको रिप्लेस करेगी। अगर दूसरी बार भी आइटम खराब निकल जाए  
   तो रिफंड मिल सकता है।


4- अगर आप ऑनलाइन पेमेंट से बचना चाहते हैं तो कैश-ऑन-डिलीवरी का ऑप्शन चुन सकते हैं।
5- डिलीवरी लेते उसे लाने वाले व्यक्ति के सामने ही सामान को चैक करने में कोई हर्ज नहीं है। अगर सामान महंगा है तो पैक खोलते वक्त  वीडियो बना सकते हैं। फोटो तो ज़रूर ही लें।


6- अगर सामान आपके मन को नहीं भा  रहा है या उसकी क्वालिटी में कोई कमी है तो फौरन रिटर्न की प्रक्रिया शुरू कर दें।


7-  कभी-कभी कुछ सस्ते आइटमों में चुनाव करना बड़ा कठिन होता है। ऐसे में दो समान आइटम का ऑर्डर दिया जा सकता है बाद में जो ज्यादा अच्छा लगे उसे रखा जा सकता है और दूसरे को लौटाया जा सकता है।



     इसके अतिरिक्त भी ऑनलाइन शॉपिंग करते वक्त जो सावधानियां आप बरत सकते हैं बरतनी चाहिए। अगर आप ध्यान से ऑनलाइन शॉपिंग करेंगे तो निराशा नहीं होंगे।