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Friday, April 9, 2010

मुट्ठी में बंद रेत की मानिंद वक़्त गुज़र गया!

मुट्ठी में बंद रेत की मानिंद वक़्त गुज़र गया,
देखते ही देखते मौसम बदल गया!

एक मैं  ही वक़्त  के साथ न  चल सका,
सारा जमाना कितना आगे निकल गया!



Thursday, April 8, 2010

ज़िंदगी के खट्टे-मीठे रंग

ज़िंदगी भी अजीब  रंग दिखाती है।
क़दम-२ पर इंसान को आजमाती  है।
कभी  मिलती है  ख़ुशी तो कभी ग़म,
कभी हिस्से में मायूसी भी आती है।



Friday, April 2, 2010

कातिल हैं तेरी अदाएं


Heart feelings
सांकेतिक चित्र 


1. जब से मिली हैं नज़रें, नींद आँखों से दूर है  
    हर-पल बेचैन हैं, बेखबर हमारे हूजूर हैं।  
   वो कहते हैं हमें नींद न आने की बीमारी है
   हम कहते हैं ये आपकी निगाहों का कसूर है

२. तेरी बेवफ़ाई ने दिए ज़ख़्म ऐसे कि कोई मरहम.      भी काम न आ सका।
     चाह तो बहुत कि भूला दें तुझे, यह बात और कि भूलाया न जा सका। 


     
5-  कातिल हैं तेरी अदाएं, ग़ज़ब ढाये तेरा मुस्कराना।
      क़त्लेंआम  हो जाएगा सनम, महफिल में न आना।



४-  मोहब्बत में कई  बार ऐसे लम्हें आते हैं,
     जब रातों में जागते हुए भी सपने आते हैं। 
     दुनिया समझ जाती है कि कुछ गड़बड़ है,
     लेकिन वो सबसे बड़े मासूम बन जाते हैं।



३-   सच तो यह है कि मोहब्बत भी वो टूटकर करते थे,
       बदक़िस्मती हमारी, वो इश्क किसी और से करते थे।



           विशेष- ब्लॉग जगत में मेरी पहली पोस्ट                  

                                      धन्यवाद।