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Friday, January 15, 2021

जर्नलिज्म में करियर कैसे बनाएं

पत्रकारित (जर्नलिज्म) में करियर कैसे बनाएं (How to make a career in Journalism)? यहां पढ़े पूरी जानकारी..


24/7 घंटे चलने वाले न्यूज़ चैनलों के दौर में बहुत से युवा पत्रकारिता यानी जर्नलिज्म के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना रखते हैं। हालांकि अपने लिए किसी भी करियर के चुनाव से पहले अपनी रुचि और अपनी पसंद के करियर के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। केवल बाहरी चमक-दमक और सुनी-सुनाई बातों में आकर करियर का चुनाव नहीं करना चाहिए बल्कि अपने रूझान और अपनी योग्यता के आधार पर अपने करियर का चुनाव करना चाहिए।  इस लेख में आपको पत्रकारिता में करियर बनाने की पूरी जानकारी मिलेगी।  


कौन बन सकता है पत्रकार?


Media Professionals


अगर आपकी भाषा पर पकड़ है, लिखने और पढ़ने (ख़ासकर अख़बार) का शौक़ है, नई-नई बातें सीखने से घबराते नहीं है, देश-दुनिया के बारे में जानने -समझने का ज़ुनून है, लोगों को हो रही समस्याएं आपको परेशान करती हैं, उन समस्याओं की जड़ में जाने को उत्सुक रहते हो, किसी से सवाल पूछने में घबराते नहीं हो  और आपका सबसे ज्यादा रूझान पत्रकारिता में ही है तो यहां आपका स्वागत है। याद रखना कि पत्रकारिता में चुनौती भी है और ज़िम्मेदारी भी। अधिकतर युवा न्यूज़ एंकर या रिपोर्टर बनना चाहते हैं। युवाओं को ध्यान देना होगा कि इस क्षेत्र में वैसे तो करियर की असीम संभावनाएँ हैं लेकिन  केवल टीवी न्यूज़ रिपोर्टर या एंकर बनने की इच्छा रखने की बजाय एक संपूर्ण पत्रकार  बनने की चाह रखनी चाहिए।  

शैक्षिक योग्यता

पत्रकार  बनने के लिए कम से कम ग्रेजएट होना चाहिए। साथ ही पत्रकारिता में डिग्री या डिप्लोमा भी हासिल करना चाहिए।

जर्नलिज़्म में डिग्री या डिप्लोमा हासिल करना ज़रूरी!

पत्रकार यानी जर्नलिस्ट बनने के लिए गहरी समझ की ज़रूरत होती है। अपने देश के इतिहास और भूगोल  के साथ-साथ यहां के सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक ताने-बाने की बारीक समझ  होनी चाहिए। साथ ही देश के संविधान का ज्ञान होना भी बहुत ज़रूरी है। आपकी किसी भाषा पर ज़बरदस्त पकड़ होनी चाहिए। साथ ही उचित ट्रेनिंग की भी आवश्यकता होती है।  इसलिए जर्नलिज़्म में करियर बनाने के लिए आपको पत्रकारिता की डिग्री या डिप्लोमा हासिल करने का प्रयास करना चाहिए। 12 वीं के बाद सीधे बीजेएमसी(बैचलर इन जर्नलिज्म एंड मैस कम्युनिकेशन)  या बीएमसी (बैचलर इन मैस कम्युनिकेशन)  का कोर्स किया जा सकता है। अगर आपने किसी भी संकाय या स्ट्रीम में ग्रेजुएशन कर लिया है तो किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से पत्रकारिता  या जन संचार के फील्ड में एक साल का पीजी डिप्लोमा या दो वर्ष की मास्टर डिग्री हासिल कर सकते हैं। 


जर्नलिज़्म में डिग्री या डिप्लोमा कहां से करें?


देशभर में कई विश्वविद्यालय पत्रकारिता में डिग्री और  डिप्लोमा स्तर के कोर्स कराते हैं। अपनी सुविधानुसार कोर्स और संस्थान यानी यूनिवर्सिटी कोर्स संचालित कराने वाले कॉलेज का चयन किया जा सकता है। नियमित तौर परअख़बार पढ़कर या इंटरनेट के माध्यम से आप कॉलेज का चुनाव कर सकते हैं। कॉलिज का चुनाव करते वक्त यह अवश्य जान लें कि संबंधित कॉलिज यूजीसी से मान्यताप्राप्त कॉर्स कराता है। प्राइवेट मीडिया संस्थान है तो यह जानना आवश्यक है कि वो संस्थान किससे मान्यताप्राप्त है और कोर्स कराने के बाद इंटर्नशिप व प्लेसमंट में किसी प्रकार मदद देगा। हो सके तो उस प्राइवेट मीडिया संस्थान के भूतपूर्व छात्र-छात्राओं से (कम से कम 8-10) से इस संबंध में बात करें। 


इंटर्नशिप

डिग्री या डिप्लोमा के बाद आपको इंटर्नशिप करने का प्रयास करना होगा।  इंटर्नशिप में आपको इस क्षेत्र की बारीकियां सीखने के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी हासिल होगा। हालांकि इटर्निशिप इतनी आसानी से हासिल नहीं होती क्योंकि देश में हर जगह तो ऐसे संस्थान नहीं है जहां पर इंटर्निशिप की जा सके। छोटे-छोटे शहरों में रहने वाले पत्रकारिता के छात्र-छात्राओं को इंटर्नशिप के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। इसके बाद किसी न्यूज़ चैनल या मीडिया संस्थान मे इटर्निशिप के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। हालांकि जिस संस्थान से आप पढ़कर आएं हैं और जिन लोगों ने आपको पढ़ाया है उस संस्थान और उन पढ़ाने वालों से गाइडेंस लिया जा सकता है।


टेक्नीकल ज्ञान

डिजिटल युग में जर्नलिज्म करना थोड़ा आसान हुआ है तो थोड़ा चुनौतीपूर्ण। आसान इसलिए हुआ है कि जल्द से जल्द सही फॉर्मेट में अपनी ख़बर ब्रेक करने में तकनीक यानी टेक्नोलजी आपकी बहुत मदद करती है। चुनौतीपूर्ण इसलिए कि उस तकनीक को आपको सीखना भी पड़ता है। हालांकि सारा काम आपको नहीं करना पड़ता लेकिन आपको आना ज़रूर चाहिए। ग्राफिक्स और वीडियो एडिटिंग का बेसिक ज्ञान तो होना ही चाहिए।


अलग-अलग बीट यानी फील्ड के पत्रकार


यह जानना भी ज़रूरी है कि पत्रकार अपनी रूचि यानी रूझान या दिलचस्पी और योग्यता के आधार पर अपने पसंदीदा विषय या क्षेत्र यानी फील्ड को कवर करते हैं। जर्ललिज़्म की भाषा में इसे 'बीट' कहा जाता है। अगर आप राजनीतिक मुद्दों पर पकड़ रखते हैं और आपका रूझान इसी में है तो आप राजनीतिक बीट कवर करते हैं। किसी को अपराध से जुड़े मामलों पर दिलचस्पी है तो वह क्राइम बीट देखता है।

काम की प्रकृति यानी नेचर के आधार पर आप  एंकर, रिपोर्टर, कॉपी राइटर, एडिटर, कैमरापर्सन, वीडियो एडिटर आदि  के रूप में काम कर सकते हैं। अपनी रुचि यानी दिलचस्पी और योग्यता के आधार पर एंकर या रिपोर्टर और अन्य पद हासिल कर सकते हैं। 

इसी तरह से अगर अख़बार और पत्र-पत्रिकाओं में काम करने वाले पत्रकारों को प्रिंट का पत्रकार और टीवी न्यूज़ चैनलों में काम करने वाले पत्रकारों को इलेक्टॉनिक मीडिया या टीवी पत्रकार के रूप में जाना जाता है। आजकर वेब यानी किसी वेबसाइट से जुड़े पत्रकार को को वेब पत्रकार या जर्नलिस्ट कहा जाता है। पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र में भी  पत्रकार काम करते हैं। इस तरह से आप प्रिंट पत्रकारिता, इलेक्ट्रॉनिक या टीवी पत्रकारिता, वेब पत्रकारिता  यानी ऑनलाइन जर्नलिज्म या पत्रकारिता और पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र में करियर बनाते हैं।

डि़जिटल युग में  जर्नलिज़्म में संभावनाएँ

आज जर्नलिज़्म में काम करने के अवसर काफी बढ़ चुके हैं। एक जमाना था कि केवल अख़बार, पत्र-पत्रिकाओं में ही करियर बनाया जा सकता था।  बहुत सीमित संख्या में रेडियो में अवसर उपलब्ध थे। इसके बाद टीवी पत्रकारिता शुरू हुई तो पत्रकारिता में अवसर भी बढ़े तो इसके लिए क्रेज भी बढ़ा। हालांकि अवसरों की संख्या सीमित ही रही।लेकिन डिजिटल क्रांति पत्रकारों यानी जर्निलिस्टों के लिए सुनहरें दिन लेकर आई है। प्रिंट यानी अख़बार और पत्र-पत्रिकाओं के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक मीडिया जैसे सभी न्यूज़, एंटरटेनमंट, धार्मिक, अध्यात्मिक और बिज़नस  टीवी चैनलों में करियर बनाया जा सकता है। आज के दौर में न्यूज़ वेबसाइटों में करियर के ढरों अवसर सामने आ रहे हैं। रेडियो स्टेशन, कॉर्पोरेट, पीआर और एड एजेंसियों में भी मौक़े हैं।


फ्रीलांसिग

बहुत से पत्रकार फ्रीलांसर के तौर  काम करते हैं। अगर आपकी लेखन शैली ज़बरदस्त है तो आपको ढेरों अवसर मिलेंगे। आप अपनी वेबसाइट शुरू कर सकते हैं। अच्छी तरह से स्थापित वेबसाइट पर आप पैसा भी कमा सकते हैंं। दूसरे लोगों को भी रोज़गार दे सकते हैं। शुरूआत में  एक ब्लॉग बनाकर अपने विचार रखने शुरु करें। नियमित रूप से लिखेंगे तो बहुत आगे तक जाएँगे।  अगर आप लेखन के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और बेसिक ग्राफिक्स का ज्ञान भी रखते हैं तो अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च कर सकते हैं। 


लेक्चरर

जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री रखने वाले पत्रकारों के लिए अध्यापन यानी  टीचिंग के क्षेत्र में भी अवसर हैं। मास्टक डिग्री के साथ-साथ अगर आपने नेट परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाते हैं तो किसी भी कॉलिज में लेक्चरर बनने के योग्य हो जाते हैं। अगर आपकी पहचान और इमेज एक बढ़िया पत्रकार की है तो आप कई संस्थानों में गेस्ट लेक्चरर के रूप में अपनी सेवाएं दे सकते हैं। 



पत्रकार की सैलरी यानी वेतनमान


पत्रकार का वेतन कई बातों पर निर्भर करता है। उसकी अपनी योग्यता और अनुभव के साथ-साथ   उसका संस्थान यह तय करता है कि कितना वेतन होगा। आमतौर पर शुरूआत में  10-15 हजार मिल सकते हैं। अगर आपने किसी बहुत अच्छे संस्थान से पत्रकारिता का कोर्स किया है और बढ़िया से अपने आपको निखारा है तो और भी अधिक वेतन मिल सकता है। इसके बाद अपनी लगन और मेहनत से महीने में लाख रुपये से भी अधिक पा सकते हैं।  


जर्नलिज्म में चुनौतियां  

चुनौतियां हर क्षेत्र में होती है। लिहाजा जर्नलिज्म में भी चुनौतियां कम नहीं है। इस फील्ड में भी बहुत सारी समस्याएं हैं। पत्रकार का काम सच को सामने लाना होता है और सच यानी सत्य कड़वा होता है। सच कड़वा होता है इसलिए जिन लोगों का सच सामने आता है उन्हें वो सच हज़म नहीं होता और   ऐसे लोग पत्रकारों के दुश्मन बन सकते हैं। तमान तरह के राजनीतिक और सामाजिक दवाब पत्रकारों को झेलने पड़ते हैं। नौकरी को लेकर भी कई तरह दिक्कतें होती हैं। नौकरी आसानी से मिलती नहीं और मिलती है तो उसमें टिके रहने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं। इसमें 10 से 5 बजे की तक नौकरी का सपने रखने वालों के निराशा के अलावा कुछ हाथ नहीं लगेगा।


अगर आपने यह ठान लिया है कि पत्रकारिता में ही करियर बनाना है तो कुछ अच्छे पत्रकारों से भी चर्चा की जा सकती है। ध्यान यह रखना है कि जिस पत्रकार से आप सलाह ले रहे हैं वो अनुभवी होने के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भी हो। आजकल इंस्टाग्राम, फेसबुक  और अन्य सोशन मीडिया माध्यमों पर बड़े पत्रकारों से जुड़ सकते हैं। अगर आप अपनी आंख और कान खुले रखते हैं तो आपको अपने मतलब की जानकारी हासिल करने में कठिनाई नहीं होगी।




Sunday, December 27, 2020

डिजिटल मीडिया और पॉडकास्टिंग

डिजिटल मीडिया यानी अंकीय माध्यम का नाम आजकल हम ख़ूब सुन रहे हैं। डिजिटल को हम इस तरह समझ सकते हैं कि कोई भी डेटा जिसे डिजिट्स यानी अंकों की सीरीज़ द्वारा दर्शाया जा सकता है और मीडिया का मतलब किसी भी डेटा  को प्रसारित करने या दूसरों तक पहुंचाने के माध्यम। इस प्रकार  डिजिटल मीडिया से मतलब हुआ कि कोई भी डेटा या सूचना जिसे किसी स्क्रीन द्वारा लोगों तक पहुंचाया जा सके। इसमें टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो, और ग्राफिक्स सभी आ जाते हैं और एक स्क्रीन पर  इंटरनेट की सहायता से हम पढ़, देख, और सुन सकते हैं।  सभी सॉफ्टवेयर, वीडियो गेम्स, वेबसाइटें, सोशल मीडिया, MP3 या डिजिटल ऑडियो, इ-बुक्स, इ-डाक्यूमेंट इत्यादि डिजिटल माध्यम हैं। डिजिटल मीडिया की ख़ास बात यह है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों यानी डिवाइसेज के जरिए हम  इन्हें बना सकते हैं,  डिलीट कर सकते हैं, रूप बदल सकते हैं और दूसरों के साथ शेयर कर सकते हैं।


Digital Media


     



डिजिटल मीडिया के मुकाबले प्रिंट मीडिया जैसे अखबार, किताबें, मैग्जीनों की अपनी सीमाएं हैं। ऑडियो टेप, वीडियो टेप जैसे माध्यम भी डिजिटल के सामने कहीं टिक नहीं पाते। इसकी वजह है कि डिजिटल मीडिया ही अकेला ऐसा मीडिया है जिसमें आप टेक्स्ट पढ़ सकते हैं, वीडियो देख सकते हैं, ऑडियो सुन सकते हैं और फोटो आदि देख सकते हैं। ट्रेडिशनल मीडिया में आपको यह सुविधा नहीं मिलेगी। अखबार- मैग्जीन में केवल टेक्स्ट पढ़ सकते हैं या फोटो देख सकते हैं लेकिन ऑडियो नहीं सुन सकते। वीडियो नहीं देख सकते। रेडियो (जिस पर ऑडियो टेप चलते हैं या लाइव प्रसारण) पर केवल ऑडियो सुन सकते हैं।  टीवी जिस पर (वीडियो टेप चलते हैं या लाइव प्रसारण) पर केवल वीडियो  देख सकते हैं। हालांकि टीवी पर गाने यानी ऑडियो भी सुने जा सकते हैं। लेकिन डिजिटल माध्यम के मुकाबले यह कहीं नहीं ठहरते।  

4जी इंटरनेट यानी तेज़ गति से इंटरनेट की सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अपने देश में डिजिटल क्रांति आ गई है। मनोरंजन के हमारे तौर तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आया है। पहले जहां टीवी और रेडियो ही मनोरंजन के साधन थे वहीं आज एक सस्ते से स्मार्टफोन पर आप टीवी देख सकते हैं, गाने सुन सकते हैं, फोटों और ग्राफिक्स देख सकते हैं, मैग्जीन पढ़ सकते हैं। हम सब इस क्रांति को अपने सामने घटित होता देख रहे हैं।  आज हर वर्ग का व्यक्ति स्मार्ट फोन का इस्तेमाल कर रहा है। स्मार्टफोन को मनोरंजन और ज्ञानवर्धन दोनों के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इसी डिजिटल क्रांति के एक माध्यम या स्वरूप को पॉडकास्ट कहते हैं। जिसका इस्तेमाल हममें से कोई भी कर सकता है। 


क्पा होता है पॉडकास्ट?



रेडियो श्रोता तो हम सभी रहे हैं। रेडियो का अपना एक मज़ा है। इसमें ज्यादा झंझट नहीं होती। प्रोग्राम लगाओ..सुनते रहो। आज भी बड़ी संख्या में लोग रेडियो बड़े चाव से सुनते हैं।  इधर प्राइवेट रेडियो चैनल जैसे रेडियो मिर्ची या रेडियो सिटी  स्टेशन भी हर उम्र के सुनने वालों में काफी पॉपुलर हैं। आजकल एक नया शब्द पॉडकास्ट काफी चर्चा में है। सरल शब्दों में समझे तो ऑडियो कॉन्टेंट को पॉडकास्ट कहते हैं। नहीं समझे?  देखिए इंटरनेट और अखबार में हम जो पढ़ते हैं वह टेक्स्ट कॉन्टेंट कहलाता है। इसी टेक्स्ट को पढ़कर अगर हम रेकॉर्ड कर लें तो वह ऑडियो कान्टेंट हो जाता  है। जब कोई अपने फोन में या रेकॉर्डर पर कुछ भी रिकॉर्ड करता है और बाद में  अपने हिसाब से उसे सुनता है तो वही पॉडकास्ट है। पॉडकास्ट,  POD और BRADCAST का संक्षिप्त रूप है। POD यानी  PLAYABLE ON DEMAND और ब्रॉडकास्ट यानि प्रसारित करना। दूसरे शब्दों में कहें तो जब मर्जी करें पॉडकास्ट सुन लिया ।


                   
what is podcasting?
                   


रेडियो और पॉडकास्ट में अंतर



 बस इतना अंतर है कि रेडियो में लाइव प्रसारण और रेकॉर्डिंग दोनों सुनाए जाते हैं। पॉडकास्ट में एक  बार रेकॉर्ड कर लेते हैं और जब मर्जी करें इंटरनेट पर सुन सकते हैं। पॉडकास्ट की तुलना में रेडियो एक महंगा और अपेक्षाकृत जटिल माध्यम है साथ ही रेडियो तक सबकी पहुंच नहीं होती। दरअसल रेडियो में प्रोग्राम तैयार करने वाली टीम होती है और उसमें चंद लोग ही अपना हुनर दिखा सकते हैं।  दूसरी ओर पॉडकास्ट बहुत सरल है। रेडियो में जो सीमाएं हैं वो पॉडकास्ट में नहीं है। हर वो व्यक्ति जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है वह पॉडकास्ट बना सकता है। अपनी प्रतिभा या हुनर को दूसरों को दिखा सकता है। मान  लीजिए ..कोई शख्स कहानी बड़े दिल्चस्प अंदाज़ मे सुनाता है। इसका मतलब यह हुआ कि वो शख्स एक बढ़िया कहानी कहने वाला यानी स्टोरी टेलर हुआ। अब अगर रेडियो के सहारे रहेगा...तो पता नहीं कब नंबर आएगा। वह वीडियो  के माध्यम से भी अपने हुनर को दुनिया के सामने ला सकता है लेकिन वीडियो का माध्यम भी  पॉडकास्ट के मुकाबले अपेक्षाकृत जटिल है।  



कैसे बनाएं पॉडकास्ट?

आज ऐसे बहुत से एप उपलब्ध हैं जिन पर रजिस्ट्रेशन कर आप आसानी से पॉडकास्ट बना और सुन सकते हैं इसके लिए आपके पास स्मार्टफोन या कंप्यूटर है का होना बहुत जरूरी है। एंकर एक ऐसा ही ऐप है जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं। उस पर रजिस्टर कर आसानी के साथ आप जो कुछ भी कहना चाहते हैं उसे रेकॉर्ड कर सकते हैं। एंकर एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिस पर आसानी से पॉडकास्टिंग की जा सकती है। और भी बहुत से एप हैं जिन पर आप पॉडकास्टिंग कर सकते हैं।


पॉडकास्टिंग में संभावनाएँ

भारत में तकरीबन 70 करोड़  इंटरनेट  यूजर्स हैं। हालांकि पॉडकास्ट सुनने वालों की संख्या इतनी नहीं है लेकिन इस बात की पूरी संभावन है कि भविष्य में पॉडकास्ट सुनने वालों की संख्या बढ़ेगी। आज भी कई वेबसाइटें हैं जिन पर कहानियां, इतिहास वगैरहा से संबंधित पॉडकास्ट सुन सकते हैं। पॉडकास्ट बेवसाइटें अच्छा पैसा कमा रही हैं।व्यक्तिगत रूप से अगर कोई पोडकास्टिंग करता है तो वह भी धन कमा सकता है। आप जिस क्षेत्र के भी जानकार हैं उस क्षेत्र की नोलिज रेकॉर्ड कीजिए और दूसरों के साथ शेयर करें। एक बार फेमस हुए नहीं कि आपकी आमदनी शुरू।

मान लीजिए कि मुझे पढ़ाना अच्छा लगता है तो मैं अपने पसंदीदा विषय पर ज्ञानवर्धक जानकारी रेकॉर्ड कर लगातार दूसरों के साथ शेयर कर सकता हूं। धीरे-धीरे मेरी फैन फोलोइंग बढ़ेंगी तो आमदनी भी शुरू हो जाएगी। अगर आप  कविता या शायरी अच्छी लिख और पढ़ या कर सकते हैं उसे रेकॉर्ड कर फेमस   हो सकते हैं।  
 

पॉडकास्ट ही क्यों?


पॉडकास्ट तैयार करना आसान होता है। आप आसानी से अपनी  बात को रेकॉर्ड कर दूसरों के साथ शेयर कर सकते हैं।  बस आपको उच्चारण साफ़ हो तो और बेहतर। भाषा की जानकारी आपका काम और आसान कर सकती है। हम सब जानते   हैं किसी जानकारी या कहानी  को पढ़ने या देखने की अपेक्षा बहुत सारे लोग सुनना पसंद करते हैं। दादी-नानी की कहानियां तो हम सब सुनते आए हैं न। जो मज़ा दादी-नानी की कहानियों में आता था वही मैजिक आप पॉडकास्ट के जरिए पैदा कर सकते हैं। 



सभी ब्लॉगर, ब्लोगिंग के साथ-साथ पॉडकास्टिंग कर सकते हैं। जिन विषयों पर आप ब्लॉग लिखते हैं। उन्हीं विषयों पर आप पोडकास्टिंग कर सकते हो। धन्यवाद।


                                          -वीरेंद्र सिंह
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Wednesday, December 16, 2020

धनवान कैसे बनें?

अगर आप से पूछा जाए कि आप क्या बनना चाहेंगे? एक कामयाब डॉक्टर, इंजीनियर, एथलीट, नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक या एक करोड़पति ?  आपमें से अधिकतर का जवाब करोड़पति बनना होगा। क्यों?  क्योंकि यही आज की सच्चाई है। अगर करोड़पति न भी बनना चाहें तो धनवान बनने का सपना तो हर इंसान देखता ही है। हम अगर किसी फील्ड या क्षेत्र में कामयाबी हासिल करना चाहते हैं तो उसके मूल में भी धनवान बनने की हमारी इच्छा छिपी होती है। हम सारी उम्र पैसों के पीछे ही तो  भागते हैं। आम आदमी सुबह से लेकर शाम तक चार पैसों के जुगाड़ में ज़िंदगी गुज़ार देता है। अगर इंसान ईमानदारी से धनवान बनने का प्रयास करता है तो इसमें कोई बुराई भी नहीं है। सब जानते हैं कि दुनिया में धन  सबकुछ भले ही न हो लेकिन बहुत कुछ है।



अगर आप अख़बार पढ़ने के शौक़ीन हैं तो यह बात अच्छे से जानते होंगे दुनिया में हर साल  लाखों लोग करोड़पति बन जाते हैं। इनमें ऐसे करोड़पतियों की संख्या अधिक होती है जिन्होंने कोई बिजनिस शुरू किया था और देखते ही देखते लखपति और करोड़पति बन गए। तो क्या नौकरी करने वाले करोड़पति नहीं बनते? बनते हैं लेकिन बहुत कम। फिर करोड़पति बनाने वाली नौकरियां इतनी आसानी से मिलती भी तो नहीं! इसके विपरीत लगभग हर बिजनिस या व्यापार में करोड़पति बनने की अपार संभावनाएं होती हैं। 

                                                                                                
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आपमें से कई लोग तर्क करना चाहेंगे कि भैये  बिजनिस करना क्या इतना आसान है? आपके तर्क में दम है। सच्चाई यह है कि बिजनिस करना भी आसान नहीं है। तो फिर क्या करें? तैयारी करें! हम जब चीज़ पाना चाहते हैं तो उसकी तैयारी करनी चाहिए। अगर बिजनिस करना है तो उसकी तैयारी करें। सफ़ल व्यापारियों , कारोबारियों के गुणों का अध्ययन करिए। उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करिए। सफ़लता आपके कदम चूमेगी। 

सफ़ल बिजनिस मालिकों के कुछ ज़रूरी गुण


1- धनवान बनने की त्रीव इच्छा
   
    बिन मांगे सब कुछ मिल जाने का इत्तेफाक कभी-कभार और बहुत कम लोगों के साथ होता है। कम से कम बिन मांगे या इच्छा किए करोड़पति या धनवान बनना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर है। त्रीव इच्छा वह ईंधन होता है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी इंसान को डटे रहने के लिए प्रेरित करता है। आप किसी भी खिलाड़ी को देख लें। टीम में सिलेक्ट होने के लिए वो एड़ी-चोटी को ज़ोर लगा देते हैं। खेल के लिए अपनी त्रीव इच्छा को लगातार व्यक्त करते हैं। दुनिया को पता चल जाता है फलां खिलाड़ी देश के लिए कुछ कर गुजरने के लिए बेताव है।  देर-सवेर उस खिलाड़ी को मौक़ा मिल ही जाता है।  याद रखिए हम जीतते तभी है जब जीतने की लालसा बेहद त्रीव हो।


                                                                
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2-  अपनी क्षमता और रुचि का सही मूल्यांकन      

              कोई भी काम करने से पहले इंसान को अपनी क्षमता और  रुचि यानी दिलचस्पी का सही मूल्यांकन कर लेना चाहिए। अमिताभ बच्चन एंक्टिग के शंहशाह हैं तो इसलिए क्योंकि वो उस काम को करते हैं जिसमें उनकी रुचि है। उनकी क्षमता है। अगर अमिताभ बच्चन किसी दूसरे क्षेत्र में गए होते तो शायद उन्हें इतनी सफ़लता नहीं मिलती! विराट कोहली एक सफ़ल क्रिकेटर हैं। ऐसा इसलिए कि उन्होंने वो करियर चुना है जिसमें उनकी रुचि है। वो पर्याप्त रूप से क्षमतावान भी हैं। इंसान को वही बिजनेस करना चाहिए जो उसकी रुचि और क्षमता के अनुरूप हो। मान लीजिए आपको पढ़ाने का शौक है और योग्य भी हैं लेकिन टीचर नहीं बन तो कोई बात नहीं। आज के डिजिटल युग में आप आसानी से ऑनलाइन पढ़ा सकते हैं। इसी काम को बड़े स्तर पर भी कर सकते हैं। 
        


3-  कॉमन सेंस

कॉमन सेंस बड़ा कॉमन होता है लेकिन दुर्भाग्य से सभी में नहीं मिलता! सच यह भी है कि सफ़ल व्यक्तियों  में कॉमन  सेंस की कमी नहीं होती है। इस बात से कोई भी इंकार नहीं करेगा कि कॉमन सेंस सफ़लता के लिए आवश्यक गुण है। कॉमन सेंस की जड़ में इंसान का ज्ञान होता है। उसका अनुभव होता है। कॉमन सेंस इंसान को जटिल चुनौतियों से पार पाने में मदद करता है। उतार-चढ़ाव के दौरान सही फैसले लेने के लिए प्रेरित करता है। व्यक्ति को उसकी मंज़िल से भटकने नहीं देता।

4- आत्मविश्वास   

कामयाबी की अहम शर्तों में आत्मविश्वास भी एक शर्त है। आत्मविश्वास के बगैर करोड़पति बनना तो दूर की बात है,  लखपति बने रहना भी मुश्किल है। अपनी क्षमता में विश्वास हो तो कोई भी  मंजिल आसानी से पाई जा सकती है। सचिन तेदुंलकर को अपनी क्षमता में यकीन था। उन्होंने सफलता की ऐसी गाथा लिखी कि लोग आज भी उनके खेल की प्रशंसा करते हैं। वीरेंद्र सहवाग के खेलने के तरीकों से तमाम क्रिकेट विशेषज्ञ सहमत नहीं थे। लेकिन सहवाग को अपने खेलने के स्टाइल पर पूरा भरोसा था। अपने उसी भरोसे के दम पर उन्होंने शानदार कामयाबी हासिल की।

5- रचनात्मकता

 घबराइये मत! रचनात्मक होने से मतलब बस इतना है कि आपके पास कुछ हटकर सोचने-करने की काबिलियत हो। कामयाबी की राह में यह बहुत काम का गुण है।  मैं जहां रहता हूं उस बाजार में एक व्यक्ति ने अपना डेयरी का कारोबार शुरू किया। आसपास कुछ और लोग भी दूध-घी बेचने का काम करते हैं। ऐसे में उस व्यक्ति ने अपने कारोबार के प्रचार के लिए एक तरीका यह निकाला कि जो कोई भी उसके यहां से एक लीटर दूध लेगा उसे एक बिस्किट का पैकेट मुफ्त मिलेगा। एक किलो पनीर के साथ 250 ग्राम हरी मटर मुफ्त मिलेगी। एक किलो घी के साथ एक लीटर दूध मुफ़्त मिलेगा।  उसकी ऐसी आक्रामक रणनीति ने दूसरे डेयरी मालिकों की नींद उड़ा दी। उसकी रणनीति उसके लिए बेहद कारगर साबित हुई। सप्ताह भर के भीतर उसकी दुकान पर ग्राहकों की भीड़ जमा होने लगी।  


और अंत में..

    हम आज जो भी हैं उसके लिए केवल हम ज़िम्मेदार होते हैं।  कुछ मामलों में अपवाद हो सकता है। हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हमारा आज, हमारे अतीत के कर्मों का परिणाम  यानी रिज़ल्ट है। कामयाब शख्स इस बात को अच्छी तरह जानता है इसलिए वो ज़िम्मेदारी लेने से कभी पीछे नहीं हटता। यह गुण हर किसी में नहीं होता। अक्सर हम अपनी असफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ते हैं। कभी-कभी यह सच भी होता है कि अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों कि वजह से कोई सफ़ल न हुआ हो। लेकिन हम अपने हिस्से की ग़लती को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। आदर्श स्थिति यह होती है कि सफ़लता के लिए सभी को श्रेय दें लेकिन असफलता या नाकामयाबी की जिम्मेदारी के लिए तत्परता से आगे आना चाहिए। 


                                                           - वीरेंद्र सिंह
                                                             -----------